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ग्रेटर नोएडा वेस्ट में कई रथों के साथ निकली भव्य राम यात्रा, अनेक सोसाइटियों में गूंजे जय श्रीराम के जयकारे

ग्रेटर नोएडा वेस्ट। प्रभु श्री रामलीला सेवा ट्रस्ट द्वारा आयोजित भव्य प्रभु श्री रामलीला महोत्सव 2026 के अंतर्गत आज ग्रेटर नोएडा वेस्ट में भव्य राम यात्रा का आयोजन किया गया। कई आकर्षक रथों के साथ निकली राम यात्रा क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों और अनेक सोसाइटियों से होकर गुजरी। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। विभिन्न सोसाइटियों के निवासियों ने राम यात्रा के दर्शन कर प्रभु श्रीराम के प्रति अपनी श्रद्धा और आस्था प्रकट की। पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बना रहा और रामभक्तों के बीच धार्मिक उत्साह देखने को मिला।

राम यात्रा ने ग्रेटर नोएडा वेस्ट में भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और प्रभु श्रीराम के आदर्शों का संदेश जन-जन तक पहुंचाया। कई रथों के साथ निकली इस यात्रा ने क्षेत्रवासियों को अपनी धार्मिक विरासत से जुड़ने का अवसर दिया। परिवारों, बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने श्रद्धापूर्वक राम यात्रा के दर्शन किए। विभिन्न सोसाइटियों से मिली सहभागिता ने इस आयोजन को सामूहिक आस्था और सांस्कृतिक एकता का स्वरूप प्रदान किया।

प्रभु श्री रामलीला सेवा ट्रस्ट की ओर से आयोजित यह राम यात्रा रामलीला महोत्सव का एक महत्वपूर्ण आकर्षण रही। इसका उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन करना ही नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम के जीवन मूल्यों, त्याग, मर्यादा, कर्तव्य और सेवा भाव को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना भी है।

रामलीला मैदान में हुआ रामायण के महत्वपूर्ण प्रसंगों का मंचन:-राम यात्रा के साथ-साथ इकोटेक-12 स्थित प्रभु श्री रामलीला सेवा ट्रस्ट के रामलीला मैदान में आज रामायण के अनेक महत्वपूर्ण प्रसंगों का प्रभावशाली मंचन किया गया। मंच पर राजतिलक की घोषणा, मंथरा-कैकेयी संवाद, रानी कैकेयी और राजा दशरथ के बीच संवाद, केवट संवाद तथा भगवान श्रीराम के वनवास जैसे प्रसंगों को प्रस्तुत किया गया।

इन प्रसंगों के माध्यम से दर्शकों को रामायण की उस कथा से रूबरू कराया गया, जिसमें राजमहल के उत्सव का वातावरण देखते ही देखते गहरे दुख में बदल जाता है। भगवान श्रीराम के राजतिलक की घोषणा से अयोध्या में प्रसन्नता की लहर दौड़ जाती है। प्रजा अपने प्रिय राजकुमार के राज्याभिषेक की प्रतीक्षा करने लगती है, लेकिन मंथरा के बहकावे में आकर रानी कैकेयी का निर्णय पूरी कथा की दिशा बदल देता है।

मंथरा और कैकेयी के संवाद का मंचन करते हुए दिखाया गया कि किस प्रकार गलत सलाह और भ्रम किसी परिवार की खुशियों को प्रभावित कर सकते हैं। इसके बाद कैकेयी द्वारा राजा दशरथ से अपने दो वरदान मांगने का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। कैकेयी भरत के लिए राजगद्दी और भगवान श्रीराम के लिए चौदह वर्ष का वनवास मांगती हैं। यह सुनकर राजा दशरथ गहरे दुख और असमंजस में पड़ जाते हैं।

राजा दशरथ और कैकेयी के संवाद ने इस प्रसंग की भावनात्मक गहराई को मंच पर जीवंत किया। एक ओर राजा दशरथ अपने प्रिय पुत्र श्रीराम से बिछड़ने की कल्पना से व्यथित दिखाई देते हैं, तो दूसरी ओर उन्हें अपने वचन की मर्यादा निभाने की विवशता का सामना करना पड़ता है।

प्रभु श्रीराम का वनवास बना त्याग और मर्यादा की अमर मिसाल:-आज की रामलीला का सबसे मार्मिक प्रसंग भगवान श्रीराम के वनवास का रहा। पिता के वचन की रक्षा और धर्म की मर्यादा बनाए रखने के लिए भगवान श्रीराम ने बिना किसी विरोध के चौदह वर्ष वन में बिताने का निर्णय लिया।

प्रभु श्रीराम का यह चरित्र भारतीय संस्कृति में आदर्श पुत्र, मर्यादा पुरुषोत्तम और कर्तव्यनिष्ठ व्यक्तित्व का प्रतीक है। उन्होंने राजगद्दी और राजमहल के सुखों की अपेक्षा पिता के सम्मान और वचन को सर्वोपरि रखा। माता सीता और अनुज लक्ष्मण का उनके साथ वन जाने का संकल्प प्रेम, निष्ठा और पारिवारिक समर्पण की भावना को दर्शाता है।

राम वनवास का यह प्रसंग दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ने के साथ-साथ जीवन का महत्वपूर्ण संदेश भी देता है कि कठिन से कठिन परिस्थिति में भी सत्य, धर्म और मर्यादा का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए। भगवान श्रीराम का जीवन हमें सिखाता है कि वास्तविक महानता अधिकार प्राप्त करने में नहीं, बल्कि अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करने में है।

केवट संवाद ने दिया प्रेम, भक्ति और समर्पण का संदेश:-आज के मंचन में केवट संवाद भी प्रमुख आकर्षण रहा। भगवान श्रीराम और केवट के बीच का यह प्रसंग निश्छल भक्ति, प्रेम और समर्पण की अनुपम मिसाल है। केवट का प्रभु श्रीराम के प्रति अनुराग यह संदेश देता है कि ईश्वर के प्रति सच्ची श्रद्धा धन, पद और प्रतिष्ठा से नहीं, बल्कि हृदय की पवित्रता से जुड़ी होती है।

इस प्रसंग के माध्यम से भगवान श्रीराम के करुणामय और भक्तवत्सल स्वरूप को प्रस्तुत किया गया। केवट और प्रभु श्रीराम का संवाद भारतीय संस्कृति की उस परंपरा को उजागर करता है, जिसमें प्रेम, सेवा और भक्ति को सर्वोच्च स्थान दिया गया है।

रामायण के ये प्रसंग आज भी समाज को पारिवारिक मूल्यों, सामाजिक सद्भाव, मानवीय संवेदनाओं और अपने कर्तव्य के प्रति निष्ठा की प्रेरणा देते हैं।

राम यात्रा और रामलीला के माध्यम से सांस्कृतिक एकता का संदेश:-ग्रेटर नोएडा वेस्ट में निकली भव्य राम यात्रा और रामलीला मैदान में हुए मंचन ने धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक सहभागिता का भी संदेश दिया। विभिन्न सोसाइटियों से लोगों का जुड़ना इस बात का प्रतीक है कि भारतीय सांस्कृतिक परंपराएं समाज को जोड़ने और सामूहिक उत्सव की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

प्रभु श्री रामलीला सेवा ट्रस्ट का प्रयास है कि ग्रेटर नोएडा वेस्ट के प्रत्येक परिवार को इस महोत्सव से जुड़ने का अवसर मिले। रामलीला के माध्यम से बच्चों और युवाओं को भगवान श्रीराम के आदर्शों से परिचित कराना तथा आने वाली पीढ़ियों तक भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं को पहुंचाना इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य है।

ट्रस्ट की ओर से सभी श्रद्धालुओं, क्षेत्रवासियों और रामभक्तों का आभार व्यक्त किया गया। साथ ही सभी से आग्रह किया गया कि वे अपने परिवार और बच्चों के साथ रामलीला मैदान पहुंचकर आगामी प्रसंगों का आनंद लें और भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लें।

प्रभु श्रीराम का जीवन हमें सिखाता है कि सत्य से बड़ा कोई धर्म नहीं, कर्तव्य से बड़ा कोई संकल्प नहीं और त्याग से बड़ी कोई महानता नहीं।इसी संदेश के साथ प्रभु श्री रामलीला सेवा ट्रस्ट द्वारा आयोजित भव्य रामलीला महोत्सव ग्रेटर नोएडा वेस्ट में भक्ति, संस्कृति और सामाजिक एकता की भावना को आगे बढ़ा रहा है।

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