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किसी भी योनि का जीव भगवान को प्राप्त कर सकता है : देवी चित्रलेखा

नोएडा। सेक्टर 11 के सामुदायिक भवन में चल रहे सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिवस में कथा वाचिका देवी चित्रलेखा ने सर्वप्रथम गजेंद्र मोक्ष की कथा का श्रवण कराते हुए बताया कि किसी भी योनि का जीव भगवान को प्राप्त कर सकता है। जिस तरह गजेंद्र नाम के हाथी को तालाब में स्नान करते हुए ग्राह नामक मगरमच्छ ने उसका पांव पकड़ लिया और सभी से मदद मांगने के बाद भी जब किसी ने मदद नहीं की तब गजेंद्र ने भगवान को खुद को समर्पित किया और भगवान ने गजेंद्र की रक्षा की। इस प्रकार भगवान को प्राप्त करने के लिए जीव योनि का कोई महत्व नहीं। उच्च योनि से लेकर निम्न योनी तक का कोई भी जीव भगवत प्राप्ति कर सकता है। कथा में आगे देवी जी ने समुद्र मंथन के बारे में बताया कि समुद्र मंथन में एक तरफ देवता और दूसरी तरफ राक्षस रहे, जहां भगवान ने मोहिनी अवतार ग्रहण करके देवताओं को अमृत पान कराया। इसके साथ ही देवी चित्रलेखा ने वामन अवतार की कथा सुनाई। भगवान वामन ने राजा बलि से संकल्प कराकर तीन पग भूमि दान में मांगी और इस तीन पग में भगवान वामन ने पृथ्वी, आकाश और तीसरे पग में राजा बलि को मापा और बलि को सुतल लोक का राजा बनाकर खुद वहां के द्वारपाल बने। इसके पश्चात देवी जी ने संक्षिप्त में प्रभु राम अवतार का श्रवण कराया बताया कि भगवान राम अपने आचरण के लिए मर्यादा पुरुषोत्तम कहे जाते हैं क्योंकि भगवान राम सभी नैतिक गुणों से संपन्न है। और कथा के विश्राम में कृष्ण जन्म की कथा को स्पष्ट करते हुए बताया कि द्वापर युग में कंस जैसे दुष्ट पापी का अत्याचार बढ़ जाने पर प्रजा के आग्रह से भगवान ने नटखट अवतार लिया और और वासुदेव जी भगवान कृष्ण को गोकुल लेकर गए। जहां भगवान कृष्ण की लीलाएं सबको आकर्षित करती हैं।

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