औद्योगिक गैसों की सुरक्षा के बावत सार- गर्भित वर्कशाॅप संपन्न
नई दिल्ली:- औद्योगिक गैस उद्योग में सुरक्षा के मानकों को और भी मजबूत करने तथा गैस सिलेंडरों की सुरक्षा से जुड़े नवीनतम उपायों एवं तकनीकों पर चर्चा के उद्देश्य से ही नॉर्थ- इंडिया इंडस्ट्रियल गैस मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन द्वारा नई दिल्ली,भारत मंडपम में विशेष सुरक्षा वर्कशाॅप का सारगर्भित प्रोग्राम संपन्न हुआ।कार्यशाला में जम्मू-कश्मीर,पंजाब व हरियाणा एवं दिल्ली राजस्थान सहित उत्तर भारत के कई राज्यों से लगभग 70 औद्योगिक गैस निर्माताओं ने भाग लिया।कार्यक्रम में,डॉ० एस०के०सिंह,उपमुख्य विस्फोटक नियंत्रक, आईपीईएसएस और पीईएसओ एवं प्रमुख, उ० सर्किल,फरीदाबाद मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे,तो वहीं व आदित्य महाराणा,उप- विस्फोटक नियंत्रक, पीईएसओ,उ०सर्किल, फरीदाबाद भी उक्त कार्यशाला में विशेष रुप से मौजूद रहे। उक्त
कार्यशाला में गैसादि के सिलेंडरों की सुरक्षा, उनके रखरखाव और संचालन और सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई और उद्योगों में आज बदली आवश्यकताओं और नई तकनीकों के बढ़ते उपयोग को देखते हुए, सिलेंडरों की पहचान ट्रैकिंग और सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीकी समाधानों को अपनाने पर विशेष जोर दिया गया। डॉक्टर एस०के०सिंह ने बताया कि भारत आज तेजी से विकास के नए दौर में प्रवेश कर रहा है,देश में सेमीकंडक्टर उद्योग, डेटा सेंटर,अर्थव्यवस्था के अन्येक नए क्षेत्रों के विस्तार के साथ साथ ही औद्योगिक गैसों की मांग व उपयोग भी बढ़ रहा है,तो गैस सिलेंडरों के सुरक्षा-मानकों को आज आवश्यकताओं अनुरूप और अधिक सुदृढ़ करना आवश्यक है।सिंह ने गैस सिलेंडरों की बेहतर पहचान और ट्रैकिंग के लिए क्यूआर कोड व बार कोड जैसी डिजिटल तकनीकों के उपयोग पर विशेष बल दिया। उक्त कार्यशाला में,उद्योग-जगत के विभिन्न प्रतिनिधियों ने भी अपने अनुभव और सुझाव साझा किए,तो वहीं अतुल गर्ग,आनंद गुप्ता,मनु राणा,संदीप गुप्ता,ऋषभ जालान व अजय गुप्ता सहित कई उद्योग प्रतिनिधियों ने गैस सिलेंडर सुरक्षा एवं उद्योग से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार साझा किए। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर,पंजाब व चंडीगढ़,राजपुरा और हरियाणा व राजस्थान सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिनिधियों ने भी अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि औद्योगिक गैस के क्षेत्र में सुरक्षा केवल एक नियामकीय आवश्यकता नहीं रही है,अपितु उद्योग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उक्त कार्यशाला के माध्यम से उद्योग और नियामक संस्थाओं के बीच संवाद को और मजबूत करने तथा गैस सिलेंडर सुरक्षा के क्षेत्र में आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रक्रियाओं को अपनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई।



