साइबर क्राइम द्वारा हेंकिंग & डाटा चोरी का डर दिखा विदेशी नागरिको के साथ धोखाधडी करने वाले 16 अपराधी गिरफ्तार

नोएडा llथाना साइबर क्राइम पुलिस द्वारा इंटरनेट पर विज्ञापन चलाकर ऑनलाइन डायलर के माध्यम से विदेशी नागरिकों को हैकिंग एवं डाटा चोरी का भय दिखाकर साइबर धोखाधड़ी करने वाले फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश, 16 अभियुक्त गिरफ्तार; कब्जे से 04 लैपटॉप, 15 डेस्कटॉप, 15 मॉनिटर, 16 मोबाइल फोन, 16 माइक-हेडफोन सहित अन्य उपकरण बरामद।
दिनांक 09.04.2026 को थाना साइबर क्राइम पुलिस द्वारा लोकल इंटेलिजेंस व संकलित तकनीकि सूचनाओं के आधार पर इंटरनेट पर पेड विज्ञापन चलाकर ऑनलाइन डायलर के माध्यम से विदेशी नागरिकों को हैकिंग एवं डाटा चोरी का भय दिखाकर साइबर धोखाधड़ी करने वाले फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश करते हुए 16 अभियुक्त 1. विवेक ठाकुर 2. गौरव सिंह 3. गौरव गुप्ता 4. अभिषेक मसीह 5. अश्वनी कुमार 6. रोहन शर्मा 7. सन्त कुमार 8. उपेन्द्र सिंह उर्फ रोहित सिंह 9. अंकुश चौरसिया 10.आयुष चौबे 11. सुदीप सिंह 12. अनुपम सक्सेना 13. अभिषेक मौर्य 14. शिवम पाठक 15. प्रदीप कुमार सिंह 16. वरुण गुप्ता को सेक्टर-16 नोएडा से गिरफ्तार किया गया है। अभियुक्तों के कब्जे से 04 लैपटॉप, 15 डेस्कटॉप, 15 मॉनिटर, 16 मोबाइल फोन, 16 माइक-हेडफोन, 02 राउडर, 01 मॉडम बरामद किया गया है।
अभियुक्तगण ने पूछताछ के दौरान बताया कि वे इंटरनेट एवं विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पेड विज्ञापन चलाकर विदेशी नागरिकों को आकर्षित करते थे। इन विज्ञापनों में टोल-फ्री नंबर प्रदर्शित किए जाते थे, जिन पर कॉल करने के लिए विदेशी नागरिकों को प्रेरित किया जाता था। विज्ञापन देखने के पश्चात जैसे ही विदेशी नागरिक उक्त नंबरों पर कॉल करते थे, कॉल अभियुक्तगण के लैपटॉप में इंस्टॉल कॉलिंग सॉफ्टवेयर पर प्राप्त होती थी, जिसमें टोल-फ्री नंबर पूर्व से ही कॉन्फ़िगर किए गए थे। कॉल प्राप्त होने पर अभियुक्तगण स्वयं को टेक्निकल सपोर्ट एजेंट बताकर विदेशी नागरिकों को यह विश्वास दिलाते थे कि उनका कंप्यूटर अथवा डिवाइस हैक हो गया है। इसके उपरांत वे स्क्रीन-शेयरिंग एप्लीकेशन के माध्यम से पीड़ित के सिस्टम तक पहुंच प्राप्त कर लेते थे तथा उसकी बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी हासिल कर लेते थे। वास्तविक हैकिंग का भय उत्पन्न करने हेतु वे कंप्यूटर स्क्रीन को ब्लैक कर देते थे, जिससे पीड़ित उनकी बातों में आ जाते थे।
इसके पश्चात अभियुक्तगण प्राप्त बैंकिंग क्रेडेंशियल्स के माध्यम से पीड़ित के खाते में उपलब्ध धनराशि का आकलन करते थे। यदि खाते में कम धनराशि होती थी, तो वे 100 से 500 डॉलर तक की रकम वसूलते थे। वहीं, यदि खाते में अधिक धनराशि पाई जाती थी, तो कॉल को अपने सीनियर सहयोगियों के पास ट्रांसफर कर दिया जाता था, जो उसी कॉलिंग सॉफ्टवेयर से जुड़े रहते थे और आगे की धोखाधड़ी की प्रक्रिया संचालित करते थे।
इस प्रकार धोखाधड़ी से अर्जित धनराशि को अभियुक्तगण क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से परिवर्तित कर हवाला चैनल के जरिए प्राप्त करते थे तथा आपस में बांट लेते थे। अब तक की पूछताछ एवं अभियुक्तगण के कब्जे से बरामद मोबाइल फोन एवं लैपटॉप के विश्लेषण से करोड़ों रुपये के लेन-देन से संबंधित साक्ष्य प्राप्त हुए हैं



